शैलेश कुमार सिंह, प्रधान संपादक, अभी वार्ता
गोपालगंज की बैकुंठपुर (विधानसभा क्षेत्र संख्या 99) से राजद (RJD) विधायक प्रेम शंकर यादव इन दिनों गहरे संकट में हैं। राजनीतिक सफर पिता की विरासत से शुरू हुआ, लेकिन अब उनकी छवि पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। जनता का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है और उन पर लगे आरोपों ने राजनीतिक जमीन को हिला दिया है।

आरोपों की लंबी फेहरिस्त
विधायक बनने से पहले ही उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे। पद संभालने के बाद भी आरोपों और मुकदमों का सिलसिला नहीं थमा।
दर्जनों लोगों ने उन पर “काम करवाने के नाम पर करोड़ों रुपये” लेने का आरोप लगाया।
कई मामलों में मुकदमे दर्ज हैं, जबकि कई लोग अब भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि वे सुबह से शाम तक शराब के नशे में रहते हैं। शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब की खरीद-बिक्री से कथित संलिप्तता जनता में गुस्से का कारण बनी हुई है।
चुनावी प्रदर्शन
2020 के विधानसभा चुनाव में प्रेम शंकर यादव ने राजद प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी।
उन्हें 67,807 वोट (37.01%) मिले।
भाजपा के मिथिलेश तिवारी को 56,694 वोट (30.95%) मिले।
निर्दलीय मंजीत कुमार सिंह को 43,354 वोट (23.67%) मिले।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि जीत तो हुई, लेकिन वोट प्रतिशत में कोई भारी बढ़त नहीं मिली। यही भविष्य में उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
सामाजिक समीकरण बिगड़ते हुए
मुस्लिम मतदाताओं में उनका समर्थन घट चुका है। दलित और पिछड़ा वर्ग भी उनसे दूरी बना रहा है। इससे बैकुंठपुर का चुनावी भूगोल पूरी तरह बदल सकता है।
राजद नेतृत्व के लिए चुनौती
राजद (RJD) अगर फिर से प्रेम शंकर यादव को बैकुंठपुर से टिकट देती है तो यह सीट विपक्षी NDA के लिए लगभग आसान जीत बन सकती है। पार्टी नेतृत्व, खासकर तेजस्वी यादव के लिए यह एक कठिन फैसला होगा—क्या वे यादव पर भरोसा करेंगे या बदलाव का रास्ता अपनाएँगे?
जनता का संदेश साफ है: “हमें ऐसा नेता चाहिए जो जनता की आवाज़ बने, न कि बोझ।”










