संवाददाता: अभिमन्यु सिंह
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लखनऊ
योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में जाति-सूचक शब्दों के इस्तेमाल पर बड़ा फैसला लिया है। रविवार को जारी आदेश के तहत अब FIR, गिरफ्तारी मेमो और पुलिस रिकॉर्ड में जाति का उल्लेख पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यही नहीं, वाहनों पर जाति आधारित स्टिकर, स्लोगन, प्रतीक और पुलिस स्टेशन व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे जातिसूचक बोर्ड भी हटाए जाएंगे।

सरकार ने जाति आधारित राजनीतिक रैलियों और आयोजनों पर भी पाबंदी लगा दी है। सोशल मीडिया पर भी जाति गौरव या जातिवादी नफरत फैलाने वाली पोस्ट पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहां कानूनी रूप से ज़रूरी है, जैसे SC/ST एक्ट के मामलों में, वहां जाति का उल्लेख किया जाएगा। इसके अलावा आरक्षण और अन्य संवैधानिक प्रावधान पहले की तरह जारी रहेंगे।
नई व्यवस्था के तहत पुलिस अब पहचान के लिए माता-पिता का नाम दर्ज करेगी, जाति का जिक्र नहीं होगा। इसके लिए पुलिस मैनुअल और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में संशोधन किए जा रहे हैं।
यह कदम हाल ही में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य की राजनीति और प्रशासन में जातिगत पहचान को हतोत्साहित करने की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव है।










