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बिहार में भ्रष्टाचार पर पीके का बम: मंत्री अशोक चौधरी पर ₹200 करोड़ की लूट का आरोप, नीतीश पर भी उठे सवाल

अभी वार्ता संवाददाता | पटना

बिहार की राजनीति में शनिवार को बड़ा धमाका हुआ, जब जन सुराज अभियान के मुखिया प्रशांत किशोर (PK) ने नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी पर ₹200 करोड़ की लूट का सनसनीखेज आरोप लगा दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर PK ने दस्तावेजी सबूतों के साथ दावा किया कि यह भ्रष्टाचार कोई अपवाद नहीं बल्कि संगठित रूप से सत्ता की सरपरस्ती में चल रहा खेल है।

Indramohan kumar tunna, Ashok Chaudhary, Jogendar Yugal Kishor datta



प्रशांत किशोर के आरोप और सबूत

1. टेंडर हेराफेरी: शिक्षा विभाग और भवन निर्माण विभाग के करोड़ों के टेंडर अशोक चौधरी और उनके नजदीकी लोगों की कंपनियों को ही दिए गए।


2. जमीन का खेल: पटना में खरीदी गई जमीन पहले मंत्री के करीबी जुगल किशोर के नाम पर थी, जिसे बाद में ट्रांसफर कर मंत्री की बेटी के नाम कर दिया गया।


3. कमीशनखोरी: योजनाओं में 10% से 20% तक की वसूली तयशुदा दर पर होती रही, जिसकी रकम सीधे मंत्री नेटवर्क तक जाती है।


4. फर्जी कंपनियाँ: कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल केवल काले धन को सफेद करने के लिए किया गया।



मंत्री की कथित संपत्ति

सूत्रों के अनुसार, अशोक चौधरी की कुल घोषित व undeclared संपत्ति ₹500 करोड़ से ऊपर है, जिसमें बड़ी संख्या में बेनामी प्रॉपर्टी शामिल है।

नीतीश सरकार पर गंभीर सवाल

अगर नीतीश कुमार वास्तव में “सुशासन बाबू” हैं तो अब तक भ्रष्टाचार पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कितने नेताओं और अधिकारियों को सजा मिली?

भ्रष्टाचारियों को कैबिनेट में क्यों जगह मिलती रही?


लालू सरकार से भी बदतर?

विश्लेषकों का कहना है कि जिस “जंगलराज” का ठप्पा कभी लालू यादव पर लगता था, अब उससे भी बड़ा दाग नीतीश कुमार की सरकार पर लग चुका है। फर्क बस इतना है कि अब इसे “सुशासन” का नाम दिया गया है।

राजनीतिक मायने

PK ने नीतीश को “भ्रष्टाचार का ब्रांड एंबेसडर” बताया और कहा कि जनता अब चुप नहीं बैठेगी। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यह चुनाव नीतीश का आखिरी चुनाव साबित हो सकता है।

Abhi Varta
Author: Abhi Varta

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