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क्या जापान, नेपाल और अब फ्रांस की उथलपुथल महज़ संयोग है या ‘Deep State’ की चाल?

Diplomacy Diaries with ✍ निशांत श्रीवास्तव

अब जलता फ्रांस? वैश्विक व्यवस्था में उथलपुथल या किसी ‘Deep State’ की चाल?

जापान, नेपाल और अब फ्रांस।

दुनिया के तीन देश…
तीन भिन्न महाद्वीप क्षेत्र….
लेकिन एक जैसी बेचैनी।

क्या ये सिर्फ घरेलू असंतोष है, या इसके पीछे कोई छिपा हुआ वैश्विक खेल है?

क्या ये सभी घटनाएं किसी गहरे रणनीतिक नेटवर्क की उपज हैं….
जिसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘Deep State’ के नाम से जाना जाता है?

फ्रांस: सड़कों पर फिर आक्रोश

सितंबर 2025 की शुरुआत में फ्रांस एक बार फिर उथलपुथल की चपेट में आया।

प्रदर्शन, हिंसा, और हड़तालों ने पूरे देश को जकड़ लिया।

जनता का गुस्सा आर्थिक नीतियों, सामाजिक असमानता और प्रशासन की उदासीनता पर फूटा…..
मगर सवाल है ??
क्या यह स्वतःस्फूर्त था या किसी गहरे एजेंडे का हिस्सा?

जापान: शांति के पीछे बढ़ती चिंता

बुज़ुर्ग होती जनसंख्या, घटती जन्मदर और धीमी अर्थव्यवस्था …
जापान सतह पर शांत, लेकिन भीतर से असुरक्षित है।
राजनीतिक स्तर पर वहां भी बाहरी दखल और वैचारिक ध्रुवीकरण की खबरें आती रही हैं।

नेपाल: सत्ता का खेल या बाहरी स्क्रिप्ट?

नेपाल पिछले कुछ वर्षों से लगातार राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है।
सरकारें बनती-बिगड़ती रहीं और सीमाओ के भूगोल ने इसे और संवेदनशील बना दिया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल भूराजनीतिक दबावों का ‘सॉफ्ट टारगेट’ बन चुका है
जहां बाहरी एजेंसियां स्थानीय राजनीति को नियंत्रित करने की कोशिश करती रही हैं।

Deep State: एक अदृश्य शक्ति?

Deep State शब्द आमतौर पर उन अदृश्य शक्तियों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी देश की नीतियों को पर्दे के पीछे से प्रभावित करती हैं।

इसमें शामिल हो सकते हैं…..

वैश्विक खुफिया नेटवर्क
आर्थिक लॉबी
निजी सैन्य कंपनियां
और कभी-कभी…..
विदेशी सरकारों के एजेंट

पिछले कुछ वर्षों में यह धारणा मजबूत हुई है कि कुछ देश या गठबंधन
दूसरे देशों की स्थिरता को कमजोर कर अपने वैश्विक हित साधने की कोशिश करते हैं।

तो क्या ये सब एक ‘डोमिनोज़ प्लान’ है?
पहले जापान की सामाजिक थकावट…
फिर नेपाल की राजनीतिक टूटन…
अब फ्रांस की आग..

ये घटनाएं सिर्फ अपने-अपने देशों की कहानी नहीं हैं।

ये शायद एक रणनीतिक प्लान का हिस्सा हैं
जहां स्थिर लोकतंत्रों को कमजोर करना, वैश्विक शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ने का तरीका बन चुका है।

भारत: संयम, स्थिरता और सफलता का उदाहरण

भारत को भी अस्थिर करने के प्रयास किए गए हैं

कभी
सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें
कभी
आंदोलनों की आड़ में उकसावे,
तो कभी
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत-विरोधी नैरेटिव।

लेकिन भारत ने हर बार संविधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक संयम का परिचय दिया।
जहां दूसरे देश टूटते दिखे, वहां भारत ने विकास की गति बनाए रखी
न सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के स्तर पर भी
भारत एक ऐसा उदाहरण है जहां जनता की भागीदारी और सरकार की नीतियों में संतुलन आज भी लोकतंत्र की शक्ति को बनाए रखे हुए है।

✍️ लेखक की कलम से:

क्रांति तभी स्थायी होती है जब वो भीतर से जन्मे
लेकिन जब कोई और आपके घर की दीवारें हिलाने लगे
तो समझिए खेल अब घरेलू नहीं, वैश्विक हो चुका है।
आज की उथलपुथल सिर्फ सड़कों पर नहीं, रणनीति के नक्शों पर हो रही है और जो देश सतर्क नहीं हैं, वो अगले मोहरे बन सकते हैं।

अंत में चलते चलते

जापान, नेपाल और फ्रांस की घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं हैं।
ये शायद एक वैश्विक रणनीति का हिस्सा हैं
जहां Deep State या अंतरराष्ट्रीय शक्तियां अस्थिरता के माध्यम से प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

भारत जैसे देशों के लिए यह एक सीख है
सिर्फ आर्थिक विकास नहीं, रणनीतिक सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है।

(लेखक: निशांत श्रीवास्तव, अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ और ‘Diplomacy Diaries’ श्रृंखला के सूत्रधार)

Abhi Varta
Author: Abhi Varta

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